Kriya in Hindi | क्रिया के भेद, परिभाषा, और उदहारण | Verb in Hindi Vyakaran

Kriya in Hindi: यहाँ हिंदी व्याकरण के सन्दर्भ में क्रिया के भेद, क्रिया की परिभाषा, और क्रिया के उदहारण की विस्तार से जानकारी दी है|

Kriya in Hindi | क्रिया

हिंदी व्याकरण में सबसे महत्वपूर्ण पद में से एक है यह क्रिया| क्रिया को समजने से पहले उसकी परिभाषा को समजना चाहिए| हिंदी व्याकरण के अनुरूप यहाँ क्रिया की परिभाषा निचे दी गई है|

क्रिया की परिभाषा:

वाक्य में जिस भी शब्द या पद के द्वारा किसी भी कार्य होने या क्रिया होने का पता लगता है उन शब्द या पद को "क्रिया" कहते है|

ऊपर दी गयी क्रिया की परिभाषा से क्रिया को समजना आसान होगा|

क्रिया के उदहारण:

यहाँ निचे हमने कुछ क्रिया के उदहारण दिए है| इस उदहारण के माध्यम से क्रिया को समजते है,

  1. गीता ‘नाच रही है’।
  2. मनन दूध ‘पी रहा है’।
  3. रमेश कॉलेज ‘जा रहा है’।

यहाँ प्रथम उदहारण में गीता “नाच रही है” यानी नाचने की एक क्रिया कर रही है| द्वितीय उदहारण में मनन की बात हो रही है जो की “दूध पी रहा है” उसमे दूध पीना एक क्रिया है|तीसरे उदहारण में रमेश की बात हो रही है जो ” कॉलेज जा रहा है” यहाँ “जाना” एक कार्य है जो की रमेश कर रहा है, इसलिए यह एक क्रिया है|

क्रिया के भेद

हिंदी व्याकरण में क्रिया के दो प्रकार के भेद बताये गए है| जो की कर्म के आधार पर या रचना के आधार पर दिए गए है|

कर्म के अनुरूप क्रिया के भेद

कर्म के अनुरूप क्रिया के दो प्रकार के भेद बताये गए है| जो की निचे दिए गए है|

  1. अकर्मक क्रिया।
  2. सकर्मक क्रिया।

अकर्मक क्रिया

कुछ क्रिया ऐसी होती है जिनकी असर सिर्फ और सिर्फ “कर्ता” पर ही होती है| इनकी असर के लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती है| ऐसी क्रिया को अकर्मक क्रिया कहते है| अकर्मक क्रिया के कुछ उदहारण निचे दिए है|

अकर्मक क्रिया के उदहारण
  • मनन रोता है।
  • मछली तैरती है।
  • बस चलती है।

यहाँ ऊपर दिए गए सभी उदहारण में क्रिया सीधे रूप से कर्ता के साथ जुडी हुई है| यह कोई भी कर्म के रूप में स्थित नहीं है इस लिए यह सभी उदहारण अकर्मक क्रिया के उदहारण है| अकर्मक क्रिया की कुछ और भी क्रिया है जैसे की होना, सोना, बढ़ना, अकड़ना, खेलना, बैठना, हँसना, डरना, जीना, दौड़ना, उगना, ठहरना, चमकना, रोना, मरना, घटना, डोलना, जागना, कूदना, उछलना

सकर्मक क्रिया

कुछ क्रिया ऐसी होती है जिनकी असर सिर्फ कर्ता पर नहीं रहकर कर्म पर भी होती है ऐसी क्रियाओ को सकर्मक क्रिया कही जाती है| ऐसी क्रिया के लिए कर्म का होना आवश्यक है|

सकर्मक क्रिया के कुछ उदहारण
  • मनन लेख लिखता हूँ।
  • रमेश मिठाई खाता है।
  • राम फल लाता है।

ऊपर दिए गए सभी उदहारण में क्रिया के साथ एक कर्म के रूप में भी पद मौजूद है| इसी लिए इन सभी को सकर्मक क्रिया कहा जाता है|

रचना के आधार पर क्रिया के भेद

रचना के आधार पर हिंदी व्याकरण में क्रिया के दो भेद होते है| जो की निचे दिए गए है…

  1. रूढ़
  2. यौगिक

रूढ़ क्रिया

जिस भी क्रिया की रचना धातु से होती है ऐसी क्रिया को रूढ़ क्रिया कहते है| उदहारण के तौर पर देखे तो जैसे, लिखना, पढ़ना, खाना, पीना इत्यादि|

यौगिक क्रिया

जिस भी क्रिया की रचना एक से अधिक तत्वों के माध्यम से होती हो ऐसी क्रिया को यौगिक क्रिया कहा जाता है| उदहारण के रूप में देखे तो जैसे- लिखवाना, आते जाते रहना, पढ़वाना, बताना, बड़बड़ाना इत्यादि।

यहाँ पर हमने आपसे हिंदी व्याकरण के सन्दर्भ में क्रिया की विस्तार से जानकारी दी है हमें आशा है की आप हमारी दी हुई जानकारी से संतुष्ट होंगे| अगर आपको इस जानकारी से कोई भी प्रश्न है तो हमें कमेंट कर अवश्य बताये|

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